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Saturday, July 6, 2019
फर्क:-
फर्क:-
चलता रहता है करवाँ,
हम चले ना चले,
हँसता है ये जहान,
इसमे हमारी किलकारियां,
जुडे ना जुड़े,
बस फर्क तब पडता है,
जब हम इसमे शामील हो,
क्योकी तब किसी को,
फर्क पडे ना पड़े,
हमारे दिल को जरुर,
सुकून का अहसास मिलता है।
✍🏻डॉ स्मृति नाईक
Lovely write
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