Wednesday, October 3, 2018

अपनी सोहबत

अपनी सोहबत😊❤:-

कुछ तनहा पल अपने साथ बिताये,
पता चला मुझे कि अपने आप मे,
एक और जहान है,
इस जहान मे,
एक धडकता दिल है,
एक आलम है,
एक मस्ती है,
एक खुशी है,
और "मैं" हूँ।
अपने आप मे खुश,
अपने आप से खुश,
तनहाई मे हम अक़्सर ,
लोगो के बारे मे,
बीते लमहों के बारे मे,
सोचते इतने खो जाते है,
कि हम अपने आप के साथ,
 रहना ही भूल जाते है,
दूसरो से ऐसे पेश आओ,
जैसे तुम अपने आप से पेश आते हो,
खुश रहो,आबाद रहो,
अपनी मस्ती मे रहो,
अपनी हस्ती मे रहो,
अपने अस्तित्व को ना भूलो,
अच्छे पल,अच्छे लोग मिले ना मिले,
अपने सोहबत को इतना,
"एन्जॉय"करो,
कि आपको लगे की आप एक,
"अच्छी कंपनी"मे है।
फिर ये दूनियाँ जो कहे,
जो समझे,
आपका कारवां तो कभी ना कभी,
आपको मिलेगा ही,
चलते रहो,
"ऐसा होगा ही" इस पर विश्वास रखो।
               -✍ डॉ.स्मृति नाईक

Wednesday, June 20, 2018

"Born to be free" "मैं स्वतन्त्र हूँ ":-

"Born to be free":-

कभी कभी जज़्बात और ख़्याल,
एक दुसरे से मेल खाते नही,
कभी कभी हम इन दोनो को,
समझ ही पाते नही।
कभी जज़्बात कहते कुछ और है,
और ख्याल हमे ले जाते कहीं और है,
इस कशमकश में हम,
चले जाते कहीं और है।

अब जाना मैने अपने जज़्बात को,
और कहा ख्याल से,
क्यो ना बाटें हम,एक दुसरे के हाल को,
जब जज़्बात और ख्याल से बातें की मैनें,
तब जाना वो भी तनहा थे मेरी तरह,
मिलना चाहते थे अपने आप से,
बस राह तक रहे थे मेरी,
कि कब आकर थामुंगी मै उनकेे हाथ को।

जज़्बात और ख्याल,
पहले थे दोनो अलग-अलग,
और उन दोनो बेवकुफ़ो की,
मैं ही एक common friend थी।
आज की जब मैने पहल,
तो गुत्थी सुलझती चली गई,
और अब हम सब साथ है,
मेरे जज़्बात,मेरे ख़्याल और मैं,
अब सब complete है,
और मैं पूरी तरह स्वतंत्र हूँ।
I am born to be free💃
                  -✍डॉ.स्मृति नाईक

Friday, April 6, 2018

चाहत


चाहत किसे कहे:-


"चाहत-ए-खास को सुकून-ए-राहत तब मिले,
जब उसे प्यार और इत्मीनान से पुरा किया जाए,
वरना वो चाहत नही,बस एक तमन्ना थी,
जो दिल मे आई और चली गई।"
                            -✍🏻डॉ.स्मृति नाईक