Friday, September 15, 2017
Saturday, July 15, 2017
जज्बात
जज्बात:-
जज्बातों को काबू में करने की नहीं,
बल्कि उन्हें समझने की ज़रूरत है,
तनहाइयों में रोने की नहीं,
बल्कि तनहाईयों में खुद को,
समझने की ज़रुरत है,
अपने आप से भी कभी,
बाते करने की ज़रुरत है।
जज्बाती होना बुरा नहीं,
पर उन जजबातों को,
सही वक्त,सही तरीके से ,
और सही लोगो के सामने,
ज़ाहीर करने की ज़रुरत है,
जरुरतों को भी सही तौर पे,
'समझ पाना' यह भी तो एक ज़रुरत है।

-✍डॉ. स्मृति नाईक
जज्बातों को काबू में करने की नहीं,
बल्कि उन्हें समझने की ज़रूरत है,
तनहाइयों में रोने की नहीं,
बल्कि तनहाईयों में खुद को,

समझने की ज़रुरत है,
अपने आप से भी कभी,
बाते करने की ज़रुरत है।
जज्बाती होना बुरा नहीं,
पर उन जजबातों को,
सही वक्त,सही तरीके से ,
और सही लोगो के सामने,
ज़ाहीर करने की ज़रुरत है,
जरुरतों को भी सही तौर पे,
'समझ पाना' यह भी तो एक ज़रुरत है।

-✍डॉ. स्मृति नाईक
Tuesday, March 7, 2017
Wednesday, February 15, 2017
खुदा की रहमत
खुदा की रहमत:-
दिल के समंदर में डुबकी लगाने पर ही,
हमें हमारे अंदर छीपे मोती नज़र आते है,
पर ऐसी नज़र जो मोती को सराहे भी,
ऐसी नज़र पाने के लिए,
हम अनेको दौर से गुजरते जाते है।
कभी खुशी मतलब खुद के दिल जैसा,
कभी गम मतलब खुदा के रहम जैसा,
भ्रम है कि गम आया है,
यह अपने साथ एक सीख की कड़ी लाया है,
इस कडी के सुलझते ही,
ये ही खुशी की फिर निंव बन जाती है,
खुदा के रहम की तब याद आती है।
आज जो भी है हो रहा,
वह उस खुदा का ही तो रहम है,
साँसे है चल रही आज,
जिंदा हूं मैं आज,
कल का सवेरा भी उसी की रहमत पर होगा।
सब कुछ तय है इस जिन्दगी में,
बस हालात सबके अलग है,
कोई हमें समझेगा ही,
यह कहना भी गलत है।
बस चलते रहना अपना काम है,
खुदा ने बक्शा है जो ये दिन आज,
वही मेरे लिए है खास,
चाहे आए या ना आए मुझे इस दिन के हालात रास।
पर मेरी नज़र इसी दौरान ही बनेगी,
जो मेरे अंदर के मोती को खोजने,सराहने और तराशने,
का मुझे एक मौका देगी और मेरे लिए,
मेरी ज़िन्दगी का ये ही फिर खज़ाना होगा,
और जब मेरी जिन्दगी में,मै पीछे मुडकर देखुंगी,
तो ये ही मेरे लिए, मेरे खुदा की,
बंदगी का बहाना होगा।
-✍ डॉ.स्मृति नाईक
दिल के समंदर में डुबकी लगाने पर ही,
हमें हमारे अंदर छीपे मोती नज़र आते है,
पर ऐसी नज़र जो मोती को सराहे भी,
ऐसी नज़र पाने के लिए,
हम अनेको दौर से गुजरते जाते है।
कभी खुशी मतलब खुद के दिल जैसा,
कभी गम मतलब खुदा के रहम जैसा,
भ्रम है कि गम आया है,
यह अपने साथ एक सीख की कड़ी लाया है,
इस कडी के सुलझते ही,
ये ही खुशी की फिर निंव बन जाती है,
खुदा के रहम की तब याद आती है।
आज जो भी है हो रहा,
वह उस खुदा का ही तो रहम है,
साँसे है चल रही आज,
जिंदा हूं मैं आज,
कल का सवेरा भी उसी की रहमत पर होगा।
सब कुछ तय है इस जिन्दगी में,
बस हालात सबके अलग है,
कोई हमें समझेगा ही,
यह कहना भी गलत है।
बस चलते रहना अपना काम है,
खुदा ने बक्शा है जो ये दिन आज,
वही मेरे लिए है खास,
चाहे आए या ना आए मुझे इस दिन के हालात रास।
पर मेरी नज़र इसी दौरान ही बनेगी,
जो मेरे अंदर के मोती को खोजने,सराहने और तराशने,
का मुझे एक मौका देगी और मेरे लिए,
मेरी ज़िन्दगी का ये ही फिर खज़ाना होगा,
और जब मेरी जिन्दगी में,मै पीछे मुडकर देखुंगी,
तो ये ही मेरे लिए, मेरे खुदा की,
बंदगी का बहाना होगा।
-✍ डॉ.स्मृति नाईक
Saturday, January 21, 2017
अनजाने में हुई गलती:-
अनजाने मे हुई गलति,
माँफी के काबिल है,
क्योंकि,
इसमे जज्बातो के साथ खिलवाड करने की,
चाहत नहीं होती,
आँखो में वही ठहराव होता है,
किसी तरह की कोई हलचल नहीं होती,
चहरे पर शिंकत तो होती है गलती हो जाने की,
पर किसी तरह की विचित्र घबराहट नहीं होती,
माना बुरा लगता है हर हाल में,
पर ऐसी गलती माफ करने पर,
दिल मे चुभन सी नहीं होती।
-✍डॉ. स्मृति नाईक
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