Friday, September 15, 2017

*जज़्बात *:-

*जज़्बात *:-            


जब जागो तब सवेरा,
जब सोवों तब रात,
कह दो जो भी है दिल में तुम्हारे,
कहीं सुक ना जाए जज़्बात।
        - ✍ डॉ. स्मृति नाईक

Saturday, July 15, 2017

जज्बात

जज्बात:-
जज्बातों को काबू में करने की नहीं,
बल्कि उन्हें समझने की ज़रूरत है,
तनहाइयों में रोने की नहीं,
बल्कि तनहाईयों में खुद को,                            
समझने की ज़रुरत है,
अपने आप से भी कभी,
बाते करने की ज़रुरत है।
जज्बाती होना बुरा नहीं,
पर उन जजबातों को,
सही वक्त,सही तरीके से ,
और सही लोगो के सामने,
ज़ाहीर करने की ज़रुरत है,
जरुरतों को भी सही तौर पे,
'समझ पाना' यह भी तो एक ज़रुरत है।

                      -✍डॉ. स्मृति नाईक

Tuesday, June 6, 2017

जिंदगी और पल:-
कभी लगता है सब ठीक है जिंदगी में,
कभी जिंदगी सेहमी सी लगती है,
जिंदगी में ये बदलाव आते और जाते है,
वक्त तो फिर भी गुज़रता ही जाता है,
ठहरा तो बस ये पल है और वो भी पल भर के लिए,
आज है साथ इसका,तो क्यों ना,जी भर के जीलू इसे।
                              -✍ डॉ.स्मृति नाईक

Wednesday, March 29, 2017

ये रिश्ते:-
बहुत ही खूबसूरत होते है ये  रिश्ते,                                 
  हर पहेली का जवाब है ये रिश्ते,       
जिंदगी तो सब ही जीने आते है यहाँ,
पर जिंदगी जीना सिखाते है ये रिश्ते।
 
                           -✍डॉ.स्मृति नाईक

Tuesday, March 7, 2017

अपने अंदर झाँक कर तो देखो:-

अपने अंदर झाँक कर तो देखो:
अपने अंदर के शोलो में,
क्यों जल रहे हो बार-बार,
बस एक बार अपने आप को समेटकर,
ज़ोर लगाकर तो देखो,
यही शोले,
पुरी दुनियाँ को रोशन करने की,
ताकत रखते है।
                     डॉ. स्मृति नाईक

Wednesday, February 15, 2017

खुदा की रहमत

खुदा की रहमत:-


दिल के समंदर में डुबकी लगाने पर ही,
हमें हमारे अंदर छीपे मोती नज़र आते है,
पर ऐसी नज़र जो मोती को सराहे भी,
ऐसी नज़र पाने के लिए,
हम अनेको दौर से गुजरते जाते है।
कभी खुशी मतलब खुद के दिल जैसा,
कभी गम मतलब खुदा के रहम जैसा,
भ्रम है कि गम आया है,
यह अपने साथ एक सीख की कड़ी लाया है,
इस कडी के सुलझते ही,
ये ही खुशी की फिर निंव बन जाती है,
खुदा के रहम की तब याद आती है।
आज जो भी है हो रहा,
वह उस खुदा का ही तो रहम है,
साँसे है चल रही आज,
जिंदा हूं मैं आज,
कल का सवेरा भी उसी की रहमत पर होगा।
सब कुछ तय है इस जिन्दगी में,
बस हालात सबके अलग है,
कोई हमें समझेगा ही,
यह कहना भी गलत है।
बस चलते रहना अपना काम है,
खुदा ने बक्शा है जो ये दिन आज,
वही मेरे लिए है खास,
चाहे आए या ना आए मुझे इस दिन के हालात रास।
पर मेरी नज़र इसी दौरान ही बनेगी,
जो मेरे अंदर के मोती को खोजने,सराहने और तराशने,
का मुझे एक मौका देगी और मेरे लिए,
मेरी ज़िन्दगी का ये ही फिर खज़ाना होगा,
और जब मेरी जिन्दगी में,मै पीछे मुडकर देखुंगी,
तो ये ही मेरे लिए, मेरे खुदा की,
 बंदगी का बहाना होगा।
 
                         -✍ डॉ.स्मृति नाईक

Saturday, January 21, 2017


अनजाने में हुई गलती:-

अनजाने मे हुई गलति,
माँफी के काबिल है,
क्योंकि,
इसमे जज्बातो के साथ खिलवाड करने की,
चाहत नहीं होती,
आँखो में वही ठहराव होता है,
किसी तरह की कोई हलचल नहीं होती,
चहरे पर शिंकत तो होती है गलती हो जाने की,
पर किसी तरह की विचित्र घबराहट नहीं होती,
माना बुरा लगता है हर हाल में,
पर ऐसी गलती माफ करने पर,
दिल मे चुभन सी नहीं होती।
 
                          -✍डॉ. स्मृति नाईक

Sunday, January 8, 2017

ज़िन्दगी की किताब जब पढनी ही है हमे पूरी,
तो गम के पन्ने को जल्द से पढ-समझकर उलट दो,
खुशी का पन्ना कब से फडफड़ा रहा है,
हमसे मिलने के लिए।
                             -डॉ. स्मृति नाईक