जज्बात:-
जज्बातों को काबू में करने की नहीं,
बल्कि उन्हें समझने की ज़रूरत है,
तनहाइयों में रोने की नहीं,
बल्कि तनहाईयों में खुद को,
समझने की ज़रुरत है,
अपने आप से भी कभी,
बाते करने की ज़रुरत है।
जज्बाती होना बुरा नहीं,
पर उन जजबातों को,
सही वक्त,सही तरीके से ,
और सही लोगो के सामने,
ज़ाहीर करने की ज़रुरत है,
जरुरतों को भी सही तौर पे,
'समझ पाना' यह भी तो एक ज़रुरत है।

-✍डॉ. स्मृति नाईक
जज्बातों को काबू में करने की नहीं,
बल्कि उन्हें समझने की ज़रूरत है,
तनहाइयों में रोने की नहीं,
बल्कि तनहाईयों में खुद को,

समझने की ज़रुरत है,
अपने आप से भी कभी,
बाते करने की ज़रुरत है।
जज्बाती होना बुरा नहीं,
पर उन जजबातों को,
सही वक्त,सही तरीके से ,
और सही लोगो के सामने,
ज़ाहीर करने की ज़रुरत है,
जरुरतों को भी सही तौर पे,
'समझ पाना' यह भी तो एक ज़रुरत है।

-✍डॉ. स्मृति नाईक
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