Friday, September 15, 2017

*जज़्बात *:-

*जज़्बात *:-            


जब जागो तब सवेरा,
जब सोवों तब रात,
कह दो जो भी है दिल में तुम्हारे,
कहीं सुक ना जाए जज़्बात।
        - ✍ डॉ. स्मृति नाईक

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