Tuesday, July 16, 2019

आप(मेरे सद्गुरु):-

आप(मेरे सद्गुरु):-


प्रभुत्व भी आप,
विभुत्व भी आप,
अंत:करण का कण कण आप,
अंतरंग का 'हर' रंग आप,
हर भी आप,
हरि भी आप,
प्रत्येक करण का कारण आप,
सगुण-साकार भी आप,
निर्गुण-निराकार भी आप,
प्रेम तरंग का हर स्वर आप,
जीवन ज्योत की लौ भी आप,
जीवन का गन्तव्य भी आप,
संकल्प भी आप,
ध्येय भी आप,
चल भी आप,
अचल भी आप,
प्राणवायु में प्राण भी आप,
सृष्टि में व्याप्त भी आप,
अव्याप्त की सूक्ष्मता भी आप,
मेरे लिये मेरा अस्तित्व ही आप,
आप का सगुण रुप मेरे सद्गुरु का स्वरुप है,
मेरे लिये मेरे गुरु का रुप है।
            -✍🏻 डॉ. स्मृति देशपांडे नाईक

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