Tuesday, July 16, 2019

ए बेदाग पाक नूर!

ए बेदाग पाक नूर!:-

 


ए बेदाग पाक नूर!
तू जानता है ज़रूर,
मेरे दिल का ये सुरुर,
ना हो कोई फ़ासला,
ना हो हम तुझसे दूर,
ना हो हम कभी मजबूर,
ना आए हमे कभी भी गुरुर,
जो ले जाए हमे तुझसे थोडा भी दूर,
ऐसा ना हो जाए कभी,पर फिर भी,
माफ़ कर देना हमें और गले लगा लेना ज़रूर,
समझाके मेरे दिल को फिर जगाना वही सुरुर,
ए बेदाग पाक नूर!
ए बेदाग पाक नूर!
       -✍🏻 डॉ.स्मृति देशपांडे नाईक

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