Saturday, December 10, 2016

उगता सुर्य ये सिखलाता:-

उगता सुर्य ये सिखलाता:-

अंधियारे से लड-झगडकर,
झुलसने से बेहतर,
थोडा थम कर,
उपर उठना ही अच्छा है।
भले ही पूर्व में सोम्य भासित हो,
पर अरुण रुप रम्य और सच्चा है।
         दिव्यता और अखंडता से,
         स्वयंप्रकाशित प्रखर तेज से,
         औरों को भी प्रकाशित करता जाता,
         दिशाभुल हुए पथिको को भी फिर,
         यह प्रशस्त मार्ग है दिखलाता।
         और,
         यद्यपि सुर्य सा तेज हो फिर भी,
         अंधियारे से सहमे झुलसे मन को,
          सोम्य रूप से ही जीता है जा सकता,
          यह अपने इस दिव्य व्यवहार से,
          हम सबको है सिखलाता।
                            -✍डॉ.स्मृति नाईक

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