माफीनामा:-
जिन्दगी के इस सफर में,
जिन्दगी हम पर कई तरीके आजमाती है,
कभी इस स्टेशन,
तो कभी उस स्टेशन पर,
उतार जाती है।
हर एक स्टेशन पर,
अनेक संबंधो से जोडती जाती है।
फिर हर एक स्टेशन पर,
हमारे हर व्यवहार को,
अपने पन्नों में ये लिखतीं जाती है।
फिर किसी मोड पर या किसी स्टेशन पर,
ये अपना कोई भी पन्ना खोलकर,
हमारे बीते व्यवहार का,
हम पर परिणाम,
हमें सीख रुप में सिखाती है।
आज मैं आप सब से,
तहे दिल से माफी मांगती हूँ,
कि गर कही किसी का-किसी स्टेशन पर,
दिल मुझसे दुखा हो।
किसी अनजानी बात से मेरे,
दिल को दर्द हुआ हो।
हो सकता है कि ये "स्मृति",
आपके दिल का अब हिस्सा ना हो।
पर हो सके तो माफ करना,
जिनका कोई दुखद किस्सा हो।
हम सब का आखिरी स्टेशन,
इस जिन्दगी के पार है।
जाना तो है सभी को वहाँ,
पर कोई ना जानकार है।
मैं तो अपने दर्द पर,
मरहम लगाकर हूँ चल पडी,
हमराहो की गलतियो को माफ कर,
आगे हूँ निकल पडी,
हो सके तो आप भी ऐसा कर,
साथ मेरे निकल चलो,
मेरी भुलों को भुलाकर,
अपने मन को साफ करो।
साथ मिलकर जीने में,
अपना अलग ही एक मज़ा है,
दोस्तों की दोस्ती के बीना,
जिंन्दगी एक सज़ा है।
आओ मिलकर चले एक कारवाँ बनाए,
हसते खेलते जिंन्दगी यूँही बीत जाए।
जिंन्दगी के पार जाकर,
भगवान को मुँह भी दिखाना है,
खुश होकर जीए तेरी जिन्दगी,
ये जाकर हम सबको उसे बताना है।
-✍डॉ.स्मृति नाईक
जिन्दगी के इस सफर में,
जिन्दगी हम पर कई तरीके आजमाती है,
कभी इस स्टेशन,
तो कभी उस स्टेशन पर,
उतार जाती है।
हर एक स्टेशन पर,
अनेक संबंधो से जोडती जाती है।
फिर हर एक स्टेशन पर,
हमारे हर व्यवहार को,
अपने पन्नों में ये लिखतीं जाती है।
फिर किसी मोड पर या किसी स्टेशन पर,
ये अपना कोई भी पन्ना खोलकर,
हमारे बीते व्यवहार का,
हम पर परिणाम,
हमें सीख रुप में सिखाती है।
आज मैं आप सब से,
तहे दिल से माफी मांगती हूँ,
कि गर कही किसी का-किसी स्टेशन पर,
दिल मुझसे दुखा हो।
किसी अनजानी बात से मेरे,
दिल को दर्द हुआ हो।
हो सकता है कि ये "स्मृति",
आपके दिल का अब हिस्सा ना हो।
पर हो सके तो माफ करना,
जिनका कोई दुखद किस्सा हो।
हम सब का आखिरी स्टेशन,
इस जिन्दगी के पार है।
जाना तो है सभी को वहाँ,
पर कोई ना जानकार है।
मैं तो अपने दर्द पर,
मरहम लगाकर हूँ चल पडी,
हमराहो की गलतियो को माफ कर,
आगे हूँ निकल पडी,
हो सके तो आप भी ऐसा कर,
साथ मेरे निकल चलो,
मेरी भुलों को भुलाकर,
अपने मन को साफ करो।
साथ मिलकर जीने में,
अपना अलग ही एक मज़ा है,
दोस्तों की दोस्ती के बीना,
जिंन्दगी एक सज़ा है।
आओ मिलकर चले एक कारवाँ बनाए,
हसते खेलते जिंन्दगी यूँही बीत जाए।
जिंन्दगी के पार जाकर,
भगवान को मुँह भी दिखाना है,
खुश होकर जीए तेरी जिन्दगी,
ये जाकर हम सबको उसे बताना है।
-✍डॉ.स्मृति नाईक



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