Sunday, January 8, 2017

ज़िन्दगी की किताब जब पढनी ही है हमे पूरी,
तो गम के पन्ने को जल्द से पढ-समझकर उलट दो,
खुशी का पन्ना कब से फडफड़ा रहा है,
हमसे मिलने के लिए।
                             -डॉ. स्मृति नाईक

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