Sunday, November 13, 2016

जिन्दगी और साथ

जिन्दगी और साथ:-
सब कितना अलग लगता हैं,
अलग अलग तरह के लोगो के साथ,
अच्छा लगता है हर कोई रह रहा है,
अपने अपने ज़्जबातो के साथ।

हर एक आदमीं अपनी ही दुनिया में है,
और लिए चल रहा है,
और जी रहा है अपने अंदर,
एक और दुनिया के साथ।

कितने अलग से है सब,
फिर भी कितने एक से है,
और खुशी से जी रहे है,
एक दुजे के साथ।
 
कोई भी अच्छा या बुरा नही होता,
बस एक दुसरे से अलग है होता,
समझकर इस बात को,
अच्छा लगता है कि मैं,
जी पा रही हूँ इस ज़िन्दगी के साथ।
                           -स्मृति नाईक

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